Saturday, November 15, 2008

safar

सफ़र


आज इस सफ़र मे
याद उस सफ़र की आती है,
जिस सफ़र पर साथ चले थे शायद हम,
उस सफ़र पर, जिसकी मंजिल
तुम जानते थे मे,
उस सफ़र का हर रास्ता मुझे याद है
पर तुम भूल गए हो सब शायद,
और अब उस सफ़र की मंजिल
अलग अलग हो गयी है
तुम कहीं पहुच गए, और
मै कहीं और
तुम्हें शायद अपनी मंजिल मिल भी गयी
पर मै तन्हा निकल गया
हूँ नए सफ़र पर
इसी उम्मीद पर की
किसी किसी सफ़र पर
तुम मिलोगे जरुर, या
कोई कोई सफ़र
मुझे मेरी मंजिल पर पहुचाएगा जरुर।

आशुतोष सेठ




safar - a journey

aaj is safar mai
yaad us safar ki aati hai,
jis safar par saath chale the shayad hum
us safar par, jiski manjil
na tum jante the na mai,
us safar ka har rasta mujhe yaad hai
par tum bhul gaye ho shayad
aur ab us safar ki manjil
alag alag ho gayi hai
tum kahin pahuch gaye, aur
mai kahin aur
tumhe shayad apni manjil mil bhi gayi
par mai tanha nikal gaya
hun naye safar par
isi umeed par ki
kisi na kisi safar par
tum miloge jarur, ya
koi na koi safar
mujhe meri manjil par pahuchaega jarur.


ASHUTOSH SETH

Monday, October 13, 2008

LIFE

जिंदगी

जिन्दगी की ये परिभाषा मैंने आज से शायद साल पहले दी थी और आज भी अधूरी लगती है?




जिंदगी क्या है,
एक अबूझ पहेली
जिसे बूझ सके कोई?
या एक कटी पतंग
जिसे पा ना सके कोई?

चाहत क्यों होती है इसकी
क्यों समझ ना सके इसे कोई?
शायद जिन्दादिली का नाम जिंदगी है
या खामोशी ही जिंदगी है?

जिंदगी क्या है
एक ऐसी सच्चाई जिसका
सामना नहीं कर सकता कोई
और
मृत्यु क्या है?
जिंदगी का अंत या
एक नयी जिंदगी की शुरुवात
कोई सामना नहीं करता इसका
हर कोई दूर भागता इससे
आखिर मृत्यु भी एक
सच्चाई है,
क्या है जीवन क्या है मृत्यु
इसकी सारी दुनिया को तलाश है?

आशुतोष सेठ


As some person want English version to, so for you in English to.


JINDAGI


I define life in this manner 6 years back and still unable to find what it is?
it is one of my oldest poem?


jindagi kya hai,
ek aboojh paheli
jise bujh na sake koi?
ya ek kati patang
jise pa na sake koi?

chahat kyu hoti hai iski
kyu samajh na sake ise koi?
shayad jindadili ka naam jindagi hai
ya khamoshi ka naam jindagi hai?

jindagi kya hai
ek aisi sachhai jiska
samna nahi karta koi
aur
mrityu kya hai?
jindagi ka ant ya
ek nayi jindagi ki shuruwat
koi samna nahi karta iska
har koi dur bhagta isse
aakhir mrityu bhi ek sachhai hai,
kya hai jivan kya hai mrityu
iski sari duniya ko talash hai?


Ashutosh Seth

Monday, October 6, 2008

A LETTER

लिख्नना पड़ता है इसलिए लिखता हू

कि मजॆ मै हू.

जानता हू तुम्हॆ बड़ी खुशी हॊगी

इसलिए नही लिखता कि

सचमुच मजॆ मै हूँ .

आज यहा सबकुछ नया है

नया घर है नयॆ लॊग है

नऎ सम्बन्ध, सभी कुछ नया है,

पर इन सब कॆ बाद भी एक

अजीब सा सूनापन है

जिसॆ दॆखकर मै हैरान हू

इस खामॊशी मै क्या करू

यही सॊचकर परॆशान हू .

अब तॊ हर आवाज

अनजानी ही हॊती है

पर हर चॆहरॆ मै तुम्हारी

कुछ निशानी हॊती है

पर इस सुनॆपन मै वक्त कटता नही

और

अकॆलॆपन का अन्धॆरा "दिनभर"

हटता नही.

फिर भी य‌हा म‌जॆ मॆ हू

स‌ब आराम है, न‌यॆ लॊग है

जॊ कि अच्छे है ,

चाह‌ता हू

तुम‌ भी अच्छॆ र‌हॊ जैसा मॆरॆ

रह‌नॆ प‌र‌ र‌हा क‌र‌तॆ थॆ और

स‌ब‌ वैसा ही र‌हे जैसा

छोड़

आया था "मै" ।