
सरे राह मरने को जी चाहता है ,
यही कर गुजरने को जी चाहता है ,
ये दस्तक से तेरी जो आहट हो दिल पे ,
उसी पर बिखरने को जी चाहता है ,
वो हमसे खफा हैं हम उनसे खफा है,
पर बात करने को जी चाहता है
डुबू देगा पानी समंदर को लेकिन ,
अभी भी उतरने को जी चाहता है
बड़ा संगदिल हैं मुक़द्दर ये मेरा ,
मगर तुझ पे मरने को जी चाहता है.